अंत

और फिर एक दिन उसने मुझसे कहा कि

मैं उसके बारे मे भी कुछ लिखूं |

पर जब मैं लिखने बैठी,

ना जाने क्यों मेरि स्याही ने एक पूणृविराम सा उकेर दिया |

और मैं आज भी याद कर सोच मे पड़ जाती हूँ कि

क्या सच में कभी मुझे उसमे मेरा अंत दिखा था ?

©  श्रृष्टि रघुवंशी